कोर्ट मैरिज क्या है और क्यों जरूरी है
कोर्ट मैरिज भारत में विवाह का एक पूरी तरह वैध और कानूनी तरीका है, जिसे कानून द्वारा मान्यता प्राप्त है। आज के समय में बहुत से लोग विवाह से जुड़े कानूनी पहलुओं को नहीं समझते और गलत धारणाओं के कारण सही निर्णय नहीं ले पाते। कोर्ट मैरिज का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विवाह दोनों पक्षों की स्वतंत्र इच्छा और सहमति से हो। यह प्रक्रिया विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी है जिन्हें तुरंत कानूनी विवाह प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है।
धार्मिक शादी से पहले कोर्ट मैरिज क्या वैध है?
अक्सर यह माना जाता है कि जब तक धार्मिक या पारंपरिक शादी नहीं होती, तब तक विवाह कानूनी नहीं माना जाता। लेकिन यह धारणा पूरी तरह गलत है। भारतीय कानून आपको यह अधिकार देता है कि आप पहले कोर्ट मैरिज कर सकते हैं। इसके बाद आप कभी भी अपनी धार्मिक या सामाजिक रस्में कर सकते हैं, इस पर कानून की ओर से कोई रोक नहीं है।
कोर्ट मैरिज किन लोगों के लिए सबसे ज्यादा उपयोगी है
कोर्ट मैरिज उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी है जिन्हें तुरंत विवाह प्रमाण पत्र की जरूरत होती है। विशेष रूप से विदेश जाने वाले कपल्स, वर्किंग प्रोफेशनल्स और इंटरकास्ट या इंटरफेथ विवाह करने वाले लोगों के लिए। इस प्रमाण पत्र का उपयोग स्पाउस वीज़ा, पासपोर्ट, एंबेसी डॉक्यूमेंटेशन, नौकरी, बैंक और बीमा जैसे कार्यों में किया जा सकता है।
कोर्ट मैरिज की प्रक्रिया – स्टेप बाय स्टेप
कोर्ट मैरिज की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है ताकि आम व्यक्ति को किसी प्रकार की परेशानी न हो। पूरी प्रक्रिया कानून के अनुसार तय चरणों में पूरी होती है। सबसे पहले कोर्ट मैरिज की बुकिंग की जाती है। यह बुकिंग ऑनलाइन या कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से की जा सकती है।
कोर्ट मैरिज की तारीख और उपस्थिति
कोर्ट मैरिज केवल कार्य दिवसों में होती है, यानी सोमवार से शुक्रवार। सरकारी अवकाश के दिन कोर्ट मैरिज नहीं की जाती। तारीख तय होने के बाद दोनों पक्षों को उस दिन कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना आवश्यक होता है। साथ में दो गवाहों की उपस्थिति भी अनिवार्य होती है।
गवाहों की भूमिका और आवश्यकताएं
कोर्ट मैरिज में गवाह कोई भी विश्वसनीय व्यक्ति हो सकता है। गवाह मित्र, रिश्तेदार या परिवार का सदस्य भी हो सकता है। परिवार की भूमिका कोर्ट मैरिज में पूरी तरह स्वीकार्य होती है। यह एक आम गलतफहमी है कि कोर्ट मैरिज में परिवार शामिल नहीं हो सकता।
मैरिज रजिस्ट्रार के सामने प्रक्रिया
मैरिज रजिस्ट्रार दोनों पक्षों से सामान्य प्रश्न पूछता है। इन प्रश्नों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि विवाह स्वतंत्र इच्छा से हो रहा है। विशेष रूप से यह जांच की जाती है कि विवाह में किसी प्रकार का दबाव, डर या जबरदस्ती शामिल न हो। यह प्रक्रिया दोनों पक्षों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए की जाती है।
कोर्ट मैरिज सर्टिफिकेट का महत्व
अधिकतर मामलों में कोर्ट मैरिज सर्टिफिकेट उसी दिन जारी कर दिया जाता है। यही कारण है कि यह प्रक्रिया समय बचाने वाली और सुरक्षित मानी जाती है। यह प्रमाण पत्र पूरी तरह कानूनी होता है और भविष्य में किसी भी सरकारी या निजी कार्य में मान्य होता है।
कोर्ट मैरिज से जुड़ी आम गलतफहमियां
कई लोग सोचते हैं कि कोर्ट मैरिज केवल विवादित मामलों में की जाती है। जबकि वास्तविकता यह है कि यह एक सामान्य और सम्मानजनक कानूनी विकल्प है। कोर्ट मैरिज समाज और कानून दोनों की दृष्टि से पूरी तरह मान्य है। सही जानकारी आपको गलत निर्णय लेने से बचा सकती है।
Delhi Law Firm की भूमिका
Delhi Law Firm कोर्ट मैरिज की पूरी प्रक्रिया में कानूनी सहायता प्रदान करता है। डॉक्यूमेंटेशन से लेकर मैरिज रजिस्ट्रार के सामने उपस्थिति तक हर चरण में सहयोग दिया जाता है। हमारा उद्देश्य केवल सेवा देना नहीं, बल्कि आपको मानसिक और कानूनी रूप से आश्वस्त करना है।
पूरे भारत में कानूनी सहायता
Delhi Law Firm पूरे भारत में कोर्ट मैरिज और संबंधित कानूनी मामलों को संभालता है। चाहे आप किसी भी राज्य या शहर से हों, सही मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाता है। विवाह केवल भावनाओं का नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण कानूनी निर्णय भी है। इसलिए सही सलाह लेना आपके भविष्य को सुरक्षित बनाता है।
निष्कर्ष
कोर्ट मैरिज एक सुरक्षित, वैध और व्यावहारिक विकल्प है। पहले कोर्ट मैरिज और बाद में रस्में करना कानूनन पूरी तरह सही है। यदि आप विवाह से जुड़ा कोई भी कानूनी निर्णय लेने जा रहे हैं, तो सही जानकारी और विशेषज्ञ मार्गदर्शन के साथ आगे बढ़ें।
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